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गोविंदे तूं निरंजन तूं निरंजन तूं निरंजन राया ।तेरे रूप नाही रेख नाहीं मुदे नाही माया ।।समद नाहीं शिखर नाहीं, धरती नाहीं गगनां ...

Nature of God भगवान का स्वरूप

Nature of God भगवान का स्वरूप

Sant Kabir ke Bhajan

8 10 99
गोविंदे तूं निरंजन तूं निरंजन तूं निरंजन राया ।तेरे रूप नाही रेख नाहीं मुदे नाही माया ।।समद नाहीं शिखर नाहीं, धरती नाहीं गगनां ।रवि ससि दोउ एकै नाहीं, बहत नाहीं पवनां ।।
नाद नाहीं ब्यंद नाहीं, काल नाहीं काया ।जब तै जल व्यंब न होते, तब तूं हीं राम राया ।।जप नाहीं तप नाहीं, जोग ध्यान नहीं पूजा ।शिव नाहीं शक्ति नाहीं, देव नहीं दूजा ।।रूग न जुग न श्याम अथरबन, वेद नहीं व्याकरनां ।तेरी गति तू ही जानैं, कबीरा तेरी सरनां ।।

ना इहु मानसु ना इहु देउ । ना इहु जती कहावै सेउ ।।ना इहु जोगी ना अवधूता । ना इसु माइ न काहू पूता ।। इआ मंदर महि कौन बसाई । ता का अ...

जीव का स्वरूप Nature of Soul

जीव का स्वरूप Nature of Soul

Sant Kabir ke Bhajan

8 10 99

ना इहु मानसु ना इहु देउ । ना इहु जती कहावै सेउ ।।ना इहु जोगी ना अवधूता । ना इसु माइ न काहू पूता ।।

इआ मंदर महि कौन बसाई । ता का अंतु न कोऊ पाई ।।ना इहु पिंडु न रकतू राती । ना ईहु ब्रहमनु न इहु खाती ।।ना इहु तपा कहावै सेखु । ना इहु जीबै न मरता देखु ।।इसु मरते कउ जे कोऊ रोवै । जो रोवै सोई पति खोवै ।।गुर प्रसाद मैं डगरो पाइआ । जीवन मरनु दोऊ मिटवाइआ ।।कहु कबीर इहु राम की अंसु । जस कागद पर मिटै न मंसु ।।