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हरि बिनु कउन सहाई मन का। मात पिता भाई सुत बनिता, हित लागो सब फन का। आगे कउ किछु तुलहा बांधहु, किआ भरवासा धन का। कहा बिसासा इस भांडे का, इतन...
इक आसरा तेरा
इक आसरा तेरा
इक आसरा तेरा
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हरि बिनु कउन सहाई मन का।
मात पिता भाई सुत बनिता, हित लागो सब फन का।
आगे कउ किछु तुलहा बांधहु, किआ भरवासा धन का।
कहा बिसासा इस भांडे का, इतनकु लागै ठनका।
सगल धरम पुंन फल पावहु, धुरि बांधेहु समजन का।
कहै कबीर सुनहु रे संतहु, इहु मन उड़न पंखेरू बन का।
मात पिता भाई सुत बनिता, हित लागो सब फन का।
आगे कउ किछु तुलहा बांधहु, किआ भरवासा धन का।
कहा बिसासा इस भांडे का, इतनकु लागै ठनका।
सगल धरम पुंन फल पावहु, धुरि बांधेहु समजन का।
कहै कबीर सुनहु रे संतहु, इहु मन उड़न पंखेरू बन का।
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