13:19
संतो राह दूनो हम दीठा। हिन्दू तुरूक हटा नहिं मानै, स्वाद सभन को मीठा।। हिन्दू व्रत एकादसी साधै, दूध सिंघारा सेती। अन्न को त्यागै मन को न हटक...
हिन्दू तुरूक की एक राह है
हिन्दू तुरूक की एक राह है
हिन्दू तुरूक की एक राह है
8
10
99
संतो राह दूनो हम दीठा।
हिन्दू तुरूक हटा नहिं मानै, स्वाद सभन को मीठा।।
हिन्दू व्रत एकादसी साधै, दूध सिंघारा सेती।
अन्न को त्यागै मन को न हटकै, पारन करै सगौती।।
तुरूक रोजा नमाज गुजारै, बिस्मिल बांग पुकारै।
इनको भिस्त कहाँ ते होवै, सांझे मुर्गी मारै।।
हिन्दू की दया मेहर तुर्कन की, दोनों घट सौं त्यागी।
ये हलाल वै झटका मारै, आगि दूनो घर लागी।।
हिन्दू तुरूक की एक राह है, सतगुरू सोई लखाई।
कहहिं कबीर सुनो हो संतो, राम न कहेउ खुदाई।।
हिन्दू तुरूक हटा नहिं मानै, स्वाद सभन को मीठा।।
हिन्दू व्रत एकादसी साधै, दूध सिंघारा सेती।
अन्न को त्यागै मन को न हटकै, पारन करै सगौती।।
तुरूक रोजा नमाज गुजारै, बिस्मिल बांग पुकारै।
इनको भिस्त कहाँ ते होवै, सांझे मुर्गी मारै।।
हिन्दू की दया मेहर तुर्कन की, दोनों घट सौं त्यागी।
ये हलाल वै झटका मारै, आगि दूनो घर लागी।।
हिन्दू तुरूक की एक राह है, सतगुरू सोई लखाई।
कहहिं कबीर सुनो हो संतो, राम न कहेउ खुदाई।।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

0 comments: