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मन रे हरि भजि, हरि भजि, हरि भजि भाई। जा दिन तेरो कोई नांहीं, ता दिन राम सहाई।। तन्त ना जानूं मंत ना जानूं, जानूं सुन्दर काया। मीर मलिक छत्र...
हरि भजन
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मन रे हरि भजि, हरि भजि, हरि भजि भाई।
जा दिन तेरो कोई नांहीं, ता दिन राम सहाई।।
तन्त ना जानूं मंत ना जानूं, जानूं सुन्दर काया।
मीर मलिक छत्रपति राजा, ते भी खाये माया।।
वेद न जानूं भेद ना जानूं, जानूं एक ही रामा।
पंडित दिसि पछियारा कीन्हां, मुख कीन्हौं जित नामा।।
राजा अंबरिक कै कारणि, चक्र सुदर्शन जारै।
दास कबीर कौ ठाकुर एैसो, भगत की शरण ऊबारै।।
जा दिन तेरो कोई नांहीं, ता दिन राम सहाई।।
तन्त ना जानूं मंत ना जानूं, जानूं सुन्दर काया।
मीर मलिक छत्रपति राजा, ते भी खाये माया।।
वेद न जानूं भेद ना जानूं, जानूं एक ही रामा।
पंडित दिसि पछियारा कीन्हां, मुख कीन्हौं जित नामा।।
राजा अंबरिक कै कारणि, चक्र सुदर्शन जारै।
दास कबीर कौ ठाकुर एैसो, भगत की शरण ऊबारै।।
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Hari binu kaun sahai man ka. Thanks
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