हमारे गुरू करूणा सिंधु कबीर। अशरण शरण करण मुद मंगल, हरण सकल भव भीर।। जीव उद्धारण कारण प्रगटे, जग में धारि शरीर। मीर वजीर देखि भय माने, फक्कड...

करूणा सिंधु कबीर

करूणा सिंधु कबीर

करूणा सिंधु कबीर

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हमारे गुरू करूणा सिंधु कबीर।
अशरण शरण करण मुद मंगल, हरण सकल भव भीर।।
जीव उद्धारण कारण प्रगटे, जग में धारि शरीर।
मीर वजीर देखि भय माने, फक्कड़ वेश फकीर।।
शाह सिकन्दर कसनी लीन्हा, करि बहु विधि तदवीर।
नहिं वश चले हारि तव चरणन, आई पड़े आखीर।।
वीर बघेला के सद्गुरू हैं, बिजली खाँ के पीर।
हिन्दु—मुसलमान दोउ की, तोरी भरम जंजीड़।।
धर्मदास कहें और कौन हैं, अस समरथ मति धीर।
मगहर सूखी नदी बहाए, आमी अमृत नीर।।
हमारे गुरू.........................

1 comment

  1. ये हमारा सौभाग्य है कि परम पूज्य गुरूदेव जी की असीम अनुकम्पा के कारण हमें संत कबीर साहेब के पद चिन्हों पर चलने का सुअवसर प्राप्त हुआ।

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